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Friday, 2 August 2013

अभेद्य दुर्ग में तब्दील हो जाएगा महाबोधि मंदिर

विश्व के बौद्ध श्रद्धालुओं के आस्था का प्रमुख केन्द्र विश्वदाय धरोहर महाबोधि मंदिर देश का पहला धार्मिक स्थल है जिसकी सुरक्षा की जिम्मेवारी सीआइएसएफ (केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) को सौंपने की घोषणा गृह मंत्रालय द्वारा की गई है। शीघ्र ही महाबोधि मंदिर परिसर अभेद्य दुर्ग में तब्दील हो जाएगा।

मंदिर परिसर को सीआइएसएफ के जवान किलाबंदी कर देंगे। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि सीआइएसएफ मंदिर को कैसे टेक ओवर करेगी और इसमें स्थानीय पुलिस-प्रशासन की क्या भूमिका रहेगी। टेक ओवर करने के बाद सीआइएसएफ द्वारा आगत देशी-विदेशी पर्यटकों के प्रवेश के लिए क्या-क्या नए नियम-कानून बनाए जाएंगे। इसको लेकर केवल कयास लगाए जा रहे हैं। प्राय: यह देखा जाता है कि सीआइएसएफ के हवाले एयरपोर्ट एवं एनटीपीसी की सुरक्षा की जिम्मेवारी रहती है। एयरपोर्ट पर तैनात सभी संवर्ग के अधिकारी व कर्मचारी का पहचान पत्र होता है। जिसे दिखाने और सघन जांच के उपरांत ही सीआईएसएफ द्वारा अंदर प्रवेश की इजाजत दी जाती है।

संभवत: बोधगया महाबोधि मंदिर में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू होगी। मंदिर में प्रवेश करने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को सघन जांच से गुजरना होगा। वहीं, मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के भिक्षु व कर्मचारियों को समिति द्वारा जारी परिचय पत्र हमेशा साथ रखना होगा। इतना ही नहीं, मंदिर समिति द्वारा स्थानीय वैसे युवक जो मंदिर में फोटोग्राफी का कार्य करते थे उन्हें भी समिति परिचय पत्र जारी करने जा रही है। साथ ही बिहार पर्यटन व मंदिर समिति द्वारा मान्यता प्राप्त गाइड के प्रवेश मामले में सीआइएसएफ का क्या नजरिया होगा यह तैनाती के बाद ही साफ हो पाएगा।

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